इग्नोर करना सीखें समझदार लोगों की सबसे बेहतरीन आदतों में से एक

 

इग्नोर करना सीखें समझदार लोगों की सबसे बेहतरीन आदतों में से एक

15 October 2022|motivation blog in hindi, motivational blog, अच्छी आदते, स्मार्ट लोगों की आदत

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इग्नोर करना सीखें समझदार लोगों की सबसे बेहतरीन आदतों में से एक होती हैं, कि वह इग्नोर करना जानते हैं उन्हें पता है किस बात पर कितना रिएक्ट करना है| वह फालतू की बातों पर अपना समय नहीं खर्च करते अगर उन्हें पता है कि यह बंदे ने जो बोला है वह सत्य नहीं है. तो वह उस बात को छोड़ देते हैं, कि उसके बोलने से क्या हुआ लेकिन वही एक व्यक्ति होता है| जो हर एक चीज पर रिएक्ट करता है, किसी बात को इग्नोर नहीं करता, वह हर बात पर कुछ ना कुछ रिएक्शन जरूर दिखाता है| और अगर उसको कोई कुछ कह दे- किसी ने गाली दे दी- तो वह उसके पास लड़ने जाएगा, उसको गाली देगा उसे तब तक जिद बाजी करेगा, जब तक या तो वह पिट ना जाए या तो पीट ना ले- या फिर वह सेटिस्फाई ना हो जाए लेकिन वह खुद को सेटिस्फाई करने के चक्कर में अपनी एनर्जी, टाइम, सब कुछ वेस्ट कर लेता है और उसके बाद उसको लगता है, कि वह उसने बहुत बेहतरीन काम किया है, कि आज किसी ने उसको गाली दी और उसने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया| लेकिन क्या यह बर्ताव उसका सही था. अगर उसको किसी ने गाली दी- किसी ने गधा कह दिया तो क्या उसके कहने से वह व्यक्ति गधा हो गया था, नहीं लेकिन उस व्यक्ति ने उस पर जब रिएक्ट किया तब वह गधा जरूर बन गया था| आप समझे मैं क्या कहना चाह रहा हूं. अगर कोई व्यक्ति आपको गाली दे रहा है, तो यह तो कोई बात बड़ी नहीं हर कोई किसी ना किसी को गाली देता है| उसने अपना काम किया उसने आपको अपने दिमाग से जो समझना था समझा, लेकिन आपको तो पता था ना कि उसकी गाली देने से कुछ नहीं होता| उसके गधे बोलने से मैं गधा नहीं बन जाता लेकिन अगर आप उसके गधे बोलने से उसकी बात पर रिएक्ट करते हो तब तो आप ने मान लिया ना कि हां मैं गधा हूं| तो इसका मतलब अगर हम उसे इग्नोर कर देते तो वह ज्यादा बैटर था|

 

  अगर हम उसे इग्नोर कर देते तो हमारी टाइम और एनर्जी दोनों बचता और कभी-कभी तो लड़ाई इतनी बढ़ जाती है कि पुलिस केस भी हो जाता है| तो कुल मिलाकर देखें तो टाइम, एनर्जी, पैसा और पारिवारिक लोग भी दुखी हो जाते हैं| आपके इस बर्ताव से, अगर आपको बहुत दूर जाना है- बहुत कुछ पाना है- तो क्या आप सभी से लड़ते हुए पहुंच सकते हो| नहीं, आप नहीं पहुंच सकते अगर आपको दूर सफर तय करना है| तो आपको अपने आप को हल्का करना होगा| आपने देखा है कि जब आप बस से जाते हो कहीं दूसरे राज्य तो आपसे क्या वहां का कंडक्टर पूछता है,. कि आपके पास जो सामान है उसका कितना वजन है, नहीं पूछता जब आप- ट्रेन से जाते हो तो क्या आप से कोई पूछता है, टीटी वगैरह कि आप के बैग के वजन कितना है. नहीं पूछता लेकिन जब आप प्लेन की सवारी करते हो तब आपको पूछा जाता है, कि आप के बैग का वजन 15 किलो से ज्यादा नहीं होना चाहिए, अगर 15 किलो से ज्यादा है, तो आपको उसके लिए फालतू पैसे देने पड़ेंगे| तो फालतू पैसे ना देने पड़े इसलिए अधिकतर लोग 15 किलो सामान ही लेकर जाते हैं लेकिन आप खुद सोचिए जब आप बस से जा रहे थे ट्रेन से जा रहे थे तब किसी ने नहीं पूछा लेकिन जब आप प्लेन से जा रहे थे, जब आपको उड़ान भरने की बारी आई आपके उड़ने की तैयारी हुई तो आप से पूछा गया कि आपके बैग का वजन कितना है, कितना बोझ है, आपके सर पर अगर वह बोझ हमारे दायरे से ज्यादा है| तो आपको वह बोझ कम करना पड़ेगा, नहीं तो उसके लिए हमें फालतू पैसा देना पड़ेगा, वरना हम आपको नहीं ले जाने देंगे| तो उसे सबसे पहले अपने मन को हल्का करना चाहिए उसको अपने बोझ को कम करना चाहिए और दोस्तों मैं एक बात इसमें और जोड़ना चाहूंगा- वह भोज सिर्फ बाहर वालों के बातों का ही नहीं ह| वह आपके घर वालों के बातों का भी हैं- कभी-कभी हमारा परिवार ही हमको सबसे ज्यादा बोलता है| सबसे ज्यादा क्रिटिसाइज करता है| सबसे ज्यादा डिमोटिवेट करता है| पता नहीं कितने लोग मेरी इस बात से सहमत होंगे, लेकिन यह बात सत्य है| जो हमें आलोचना मिलती है- जो हमें सबसे पहले डिमोटिवेशन मिलती हैं- वह हमारे स्वयं के परिवार से मिलती हैं- तो आपको बाहर वालों के साथ-साथ अपने परिवार के लोगों की बातों का भी बुरा नहीं मानना है|


 आप बोलने दो उन्हें आपको जो करना है- आप उस पर फोकस रहो- आपको पता होना चाहिए आप का गोल क्या है- और जब आपको उड़ान भरनी है| तो सबसे पहले अपने मन को हल्का कर दो भूल जाओ- किसी के कहने से आप वह चीज नहीं बन जाते| बेवकूफी की निशानी होती है किसी की बात का जवाब देना किसी को गलत बोलना| सचिन तेंदुलकर को बहुत बार गेंदबाज आते थे और कुछ बोल कर जाते थे| उल्टा कहते थे- लेकिन कभी भी सचिन ने किसी की बात का पलट के जवाब नहीं दिया| उन्होंने हमेशा- उस बात को इग्नोर किया कि- उसके बोलने से क्या होता है कुछ नहीं, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, कि शोएब अख्तर आकर उनको बोलता है- मार कर दिखा ना तेरी बस की है तो- सचिन को पता है कि जब मारने वाली बॉल आएगी तो मैं मारूंगा- तेरे बोलने से नहीं मारूंगा बोलने से जो करते हैं 1 तरीके से आप उसके नौकर, गुलाम हो गए उसकी बात मान रहे हो, लेकिन जब आप अपनी मर्जी से करोगे तो आप अपने मन के राजा हो. आप मन के काबू में नहीं हो आपका मन आपके काबू में हैं. तो उसी प्रकार सचिन को जब भी कोई बोल कर जाता था. तो सचिन  बहुत ही शांत रहते थे और उनका जवाब अपने बल्ले से देते थे| आज तक का रिकॉर्ड है कि सचिन कभी भी किसी भी कॉन्ट्रोवर्सी में नहीं पड़े. उन्होंने किसी को गाली नहीं दी, किसी से लड़ाई नहीं करी, किसी को गलत नहीं कहा. उन्ह जब भी किसी की बात का जवाब देना होता था तो अपने बल्ले से देते थे, उसको स्वीट रिवेंज कहते हैं| मतलब अपने काम से जवाब देते थे. अपने बल्ले से जवाब देते थे. वह अपनी जुबान का उपयोग तो वह करते ही नहीं थे| किसी ने अगर उन्हें गाली दी तो- उन्होंने बोला कोई बात नहीं तेरे गाली देने से या तेरे बोलने से मुझे फर्क नहीं पड़ता| इन्हीं बर्ताव के कारण सचिन की सब सराहना करते थे| उनको सब गॉड ऑफ क्रिकेट कहते थे. अगर वह हर एक से लड़ते रहते तो, उनको कुछ नहीं मिलता, उनकी परफॉर्मेंस खराब होती है|


 आपने सुना होगा कहते हैं- ना कि कीचड़ में पत्थर मत मारो क्योंकि अगर आप की कीचड़ में पत्थर मारोगे, तो आप भी गंदे होगे. इसलिए हमेशा लोगों की बातों को सुने लेकिन उसमें कभी गौर मत करें, उसे अपने दिल पर लगा कर मत रखें, कि 20 साल बाद आप उसका रिवेंज लोगे- उससे बदला लोगे- आप किसी से बदले की आग रखकर कामयाब नहीं हो सकते| अगर आपको कामयाबी का स्वाद चखना है, तो आपको अपने दिल को हल्का रखना पड़ेगा, आपने देखा है ना रॉकेट एक हिस्से से नहीं बनता उसके तीन चार हिस्से होते हैं और जैसे-जैसे वह ऊपर जाता रहता है. वह अपना ए- एक हिस्सा छोड़ता चला जाता है, क्योंकि अगर आपका वजन ज्यादा होगा, तो आप ज्यादा ऊंचाई तक नहीं जा सकते| अगर आपके मन में किसी के लिए बदले की भावना है. तो आप ऊंचाई पर नहीं जा सकते. आप अपने टैलेंट को  उतना उजागर नहीं कर सकते, जितना आप कर सकते थे| आपको इग्नोर करना पड़ेगा- किसी की कही हुई बात को क्योंकि यह वक्त होता है. वक्त अलग-अलग होता है. जब आप कुछ नहीं थे, आपको लोगों ने बहुत कुछ बोला, आज आपके बारे में लोग अलग बोलेंगे जब आप कुछ बन जाओगे| एमबीए चायवाला ने या चाय सुट्टा वाले ने जब चाय की दुकान खोली होगी, तो लोगों ने बोला होगा यह कैसा लड़का है, कि यह चाय की दुकान खोल रहा है, लेकिन धीरे-धीरे जब उन्होंने अपनी बहुत सारी दुकानें खोल ली. तो लोगों ने बोला यह तो अंत्रप्रेनोर है| अरे वाह यह तो बहुत कामयाब हो गया, इसकी तो इतनी सारी दुकान है, पूरी इंडिया में दुकानें हो गई अब इसकी. तो अगर इन्होंने उनकी बात सुनी होती जो लोग इनको उल्टा बोलते थे| तो यह अपनी दुकान बंद करके बैठ जाते, यह उनसे बदला लेने में लग जाते, तो यह उतनी आगे नहीं बढ़ पाते, लेकिन उन्होंने बोला उनके बोलने से क्या होता है, मैं थोड़ी हूं ऐसा मेरे को पता है. मैं क्या हूं, तो आपको पता है आप क्या हो, आपको किसी के बोलने से फर्क नहीं पड़ना चाहिए|


 आपको सबसे पहले अपने वजनों को हल्का करना पड़ेगा, क्योंकि रॉकेट लाखों-करोड़ों किलोमीटर इसीलिए जा पाता है. क्योंकि उसका वजन कम होता है और जिसका वजन कम होता है. वही ऊंची उड़ान भर पाते हैं और जिनका वजन ज्यादा होता है. वह रोड पर चलते हैं और रोड पर चलने वाला व्यक्ति देर में पहुंचता है. वह लिमिटेड जा सकता है. वह उतनी दूर नहीं जा सकता जितनी दूर प्लेन जा सकता है .जितनी जल्दी प्लेन पहुंच सकता है. उतनी जल्दी रोड से जाने वाले व्यक्ति नहीं पहुंच सकता बेशक वह 100 किलोमीटर की रफ्तार से चलाएं ज्यादा से ज्यादा  150 किलोमीटर की रफ्तार से चले और उससे भी ज्यादा चला लेगा तो 200 किलोमीटर की रफ्तार से लेकिन जो प्लेन होता है. वह 700 किलोमीटर की रफ्तार से भी ज्यादा तेज चलता है. जो रॉकेट होता है. वह तो कई हजार किलोमीटर की रफ्तार से ज्यादा चलता है और जिसका जितना वजन कम होता है. वह उतनी ही ऊंचाई पर जा पाता है. तो इसलिए अगर आपको आसमान में उड़ना है.. तो आपको सबसे पहले अपने कंधों को हल्का करना होगा. अपने मन के बोझ को कम करना होगा. जब आप अपने मन से बोझ उतार देंगे, तब आप देखेंगे कि आप ऊंचाइयों को छु पा रहे हैं. लाइफ में कभी भी किसी की बात को दिल से मत लगाओ- कोई व्यक्ति इतना खास नहीं होना चाहिए कि उसके बात आपके दिल पर लगे, बल्कि उससे अगर आपको बदला लेना है| तो अपनी सफलता से लो कि आप इस लेवल पर पहुंच गए हो कि अब तेरी औकात नहीं है, कि तुम मुझ पर उंगली उठा पाओ.


 

आपको अगर किसी से बदला लेना है. तो आपको बदला लेना चाहिए जैसे महात्मा गांधी ने लिया था. एक बार महात्मा गांधी ट्रेन में सफर करने जा रहे थे. तो किसी कारणवश उनको वहां के अंग्रेजों ने उस ट्रेन से उतार दिया, कि तुम्हारी औकत की तुम हमारे साथ यात्रा करो, दफा हो जाओ यहां से, फिर महात्मा गांधी जी ने उस दिन शपथ ली कि मैं तुमको, तुम्हारे इन लोगों को अपने देश से निकाल के रहुगा, तो इसको क्या कहते हैं. स्वीट रिवेंज कि आप जलन में नहीं गए, आपने सोच समझ कर फैसला लिया, आपने उस चीज की तैयारी करी, की कैसे इन्हें मैं अपने देश से निकालु अंग्रेजों को इस बारे में सोचा| जैसे- चाणक्य को जब एक राजा ने सभा से निकाल दिया था, कि तुम काले हो तुम निकल जाओ, तुम मेरी सभा में बैठने लायक नहीं हो| तब उस दिन चाणक्य ने प्रण लिया था कि मैं जब तक तुझे तेरी इस गद्दी से हटा नहीं देता, तब तक मैं अपने बाल नहीं कटवाउगा और चाणक्य ने तब तैयारी करी और उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य जैसे महान शासक की पहचान करके, उसको तैयार किया और फिर बदला लिया अपने बेज्जती का और बेज्जती के साथ-साथ चाणक्य ने यह भी सोचा कि यह कैसा राजा है| जो अपनी प्रजा में भेदभाव कर रहा है. राजा का तो काम होता है कि सबको एक सामान देखना, परिवार से पहले वह, अपनी प्रजा को देखता है| लेकिन जहां का राजा ही एक दूसरे में भेदभाव कर रहा है. वहां की प्रजा कैसी रहेगी तो उन्होंने हमारे देश को एक बेहतरीन शासक दिया| जिसका नाम था चंद्रगुप्त मौर्य की वह सब को एक समान समझेगा और सबके साथ एक समान बर्ताव करेगा| साथ ही साथ इस देश को हमारे हिंदुस्तान को और ऊंचाइयों पर ले जाएगा| तो हमेशा अगर आपको किसी से रेवेंज लेना है. तो उसका भी एक तरीका होता है. अगर आपको किसी ने बेइज्जत किया है. तो आप पहले उस काबिल बनो कि आप उसका मुंह, बिना कुछ बोले भी बंद कर सकते हो| आपका परिवार अगर यह कहता था कि तू कुछ नहीं कर सकता- तो अपने परिवार को दिखाओ कि नहीं पिताजी-माताजी आप गलत थी| मैं आज कामयाब हूं और मैं कुछ भी कर सकता हूं| कभी भी किसी की बात को दिल से मत लगाओ, अगर आपको बदला लेना है, तो उस अपमान याद रखो लेकिन यह नहीं कि सिर्फ उस बदले के लिए ही जियो बदले के लिए नहीं जिना चाहिए, जो बदले के लिए जीते हैं. वह बेशक अच्छा करें लेकिन बेहतरीन नहीं कर पाते इसलिए हमेशा काबिल बनने के पीछे भागो दूसरों को इग्नोर करो, दूसरे क्या बोलते हैं, क्या सोचते हैं, वह आपका काम नहीं है, हमेशा खुद पर भरोसा करें और अपने कर्म करते रहें आपको कामयाबी जरूर मिलेगी| 

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