दूसरों की आलोचना करना बंद|NEVER CRITICISE ANYONE|MOTIVATION BLOG 17 September 2022|motivation blog in hindi

 

दूसरों की आलोचना करना बंद|NEVER CRITICISE ANYONE|MOTIVATION BLOG

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दूसरों की आलोचना करना बंद करें|| कभी भी हमें किसी की आलोचना नहीं करनी चाहिए| जॉनवाना मेकर कहते हैं कि उन्होंने 30 साल पहले यह बात जान ली थी कि किसी पर गुस्सा करना बेकार है| आपके पास दुनिया भर की प्रॉब्लम है, जब आप किसी की आलोचना करते हैं या किसी पर गुस्सा करते हैं तो आप सिर्फ अपना ही बुरा कर रहे हैं| हमें कभी भी दूसरे के अंदर कमी ढूंढने से पहले अपने अंदर कमी ढूंढनी नहीं चाहिए हमें यह सोचना चाहिए कि हम कैसे बिना गुस्सा करे, बिना किसी की आलोचना करें- बेहतर काम करवा सकते हैं| दूसरों की आलोचना करने से हम अपने आपको मुसीबत में भी डाल सकते हैं चलिए शुरू करते हैं आज का ब्लॉग | 


बीएफ स्पिनर जो कि बहुत ही जाने-माने दिमाग के डॉक्टर हैं उन्होंने अपने एक अध्ययन में साबित किया था कि जिन जानवरों को हम अच्छा व्यवहार करने के लिए इनाम देते हैं, वह जानवर उनसे बेहतर सीखता है जिनको हम मारते हैं- वह उस जानवर से जल्दी चीजों को सीखता है जिन जानवरों को हम मारते हैं और मार के सिखाने की कोशिश करते हैं और यही चीज इंसानों पर भी अप्लाई होती है|अगर हम किसी की आलोचना कर रहे हैं तो उसके मन में हीन भावना पैदा होने लगती हैं | वह हमसे जलने लगता है, उसकी नफरत बढ़ने लगती है हमसे , हमें ना पसंद करने लगता है| अगर हम किसी को गुस्से से बोले कि यह काम करना है, तो वह व्यक्ति उस काम को नहीं करेगा, अगर आप कहीं के मालिक हैं और आप अपने यहां काम करने वालों पर गुस्सा करते हैं या उनको किसी काम को लेकर गुस्से से कहते हैं कि यह काम तुम्हें करना है, तो वह काम जब तक ही वह करता है, तब तक ही मानता है जब तक आप उसके सामने होते हैं लेकिन जैसे ही आप उसके सामने से हटते हैं| तो वह उस काम को तुरंत ही बंद कर देता है| एक कहानी से समझते हैं| एक इंजीनियर को काम मिला होता है कि काम करने वालों पर नजर रखनी हैं| जो काम के वक्त टोपी नहीं पहनते | टोपी बहुत हार्ड होती थी, जो उन्हें किसी भी दुर्घटना से बचाने के लिए पहनाई जाती थी | तो लोग उसको नहीं पहनते थे | वह जब भी उन्हें देखता उन्हें गुस्से से कहता कि तुम इसे पहनो, तुम्हें इसे पहनना पड़ेगा, यह कंपनी के रूल्स है | तो लोग उसके सामने कुछ देर के लिए पहन लेते लेकिन जैसे ही वह हटता उस टोपी को हटा देते | फिर वह इस बात से बहुत परेशान हो गया था सबको बार-बार गुस्से से बोल कर | उसने सोचा कि क्यों ना मैं इस बार अलग तरीके से इन को समझाता हूं इस बार जब उसने किसी को बिना टोपी के देखा- तो उसने बोला कि भाई आप यह टोपी पहना करो, यह आपकी सुरक्षा के लिए हैं, अगर आप इसे नहीं पहनोगे, कल को अगर कोई पत्थर आपके सर पर आकर गिर जाता है | तो इससे आप ही को ज्यादा चोट लगेगी और यह टोपी आपको उस पत्थर की चोट से बचा सकती हैं|| जब उसने उनको प्यार से समझाया तो लोगों ने उसकी बात को समझा और उसकी पीठ पीछे भी टोपी पहनना शुरू कर दिया | इससे क्या होता है जब हम किसी की आलोचना करते हैं | तो उसके अंदर नफरत की भावना आती हैं| वह हमारी बात नहीं मानना चाहता लेकिन, वही हम किसी को प्यार से समझाते हैं| उसकी केयर करके, आपकी तबीयत की फिक्र है तो वह इंसान ज्यादा बेहतर समझता है||


 अब हम यह समझेंगे कि कैसे आलोचना हमें मुश्किल में डाल देती हैं|- अब्राहम लिंकन बहुत ही समझदार व्यक्ति थी लेकिन अपनी जवानी के वक्त में उनका बर्ताव थोड़ा अलग था | एक बार उन्होंने एक न्यूज़ पेपर में जैन शील्ड नाम के नेता पर बहुत बुरे बुरे आरोप लगाए थे और फिर किसी तरीके से उस नेता को पता चल जाता है कि ये आरोप अब्राहम लिंकन न हीं लगाए हैं तो वह गुस्से में अब्राहम लिंकन के पास जाता है और कहता है कि मैं तुम्हें लड़ाई का आवाहन देता हूं हम दोनों तलवार से लड़ाई करेंगे और देखेंगे कौन जीतेगा तो अब्राहम लिंकन अब बहुत डर गए थे उन्हें लगा क्यों नहीं तो लड़ाई झगड़ा पसंद नहीं है और अब उन्होंने गलती कर दी हैं | उसके बारे में इतना बुरा लिखकर, तो क्या उसे बहुत बुरा लग गया , जबरदस्ती उसने उनसे लड़ने के लिए बोला, तो अब्राहम लिंकन तलवार लेकर तैयार हो जाते हैं और जेंट्स शील्ड भी दोनों के बीच में लड़ाई होती हैं और इस्का फैसला एक व्यक्ति  मौत से और दूसरा व्यक्ति जीवित रहेगा| इतने में वहां पर कुछ लोग आ जाते हैं और उनका बीच-बचाव करते हैं, कि नहीं यह लड़ाई रोक दो तो इससे अब्राहम लिंकन ने सीखा, कि किसी की आलोचना करना उनको कितनी बड़ी मुसीबत में डाल सकता है | इतनी बड़ी मुसीबत में डाल सकता है कि आपका जीवन भी मुश्किल में आ सकता है, इसलिए तब से अब्राहम लिंकन ने एक सबक सिखा ठीक कभी भी किसी को गलत मत बोलो  उसके बाद से लेकर उन्होंने अपने जीवन काल में कभी भी किसी के बारे में आलोचना नहीं करी किसी को बुरा नहीं बोला | कभी भी हमें किसी की भावना को ठेस नहीं पहुंचाना चाहिए क्योंकि कभी-कभी किसी को इतना बुरा लग सकता है कि वह उसका बदला लेने के लिए आपको नुक्सान पहुचा सकता है|

 

अगर आप कहीं पर काम करते हैं और आप के नीचे बहुत सारे व्यक्ति हैं तो आप उनको प्यार से डील करें, उनको बुरा भला मत बोले उनसे प्यार से बात करें उनको प्यार से समझाएं क्योंकि जो शक्ति प्यार की होती है| वह आलोचना की नहीं होती, गुस्से की नहीं होती, गुस्सा सिर्फ नफरत फैलाता है| कभी भी किसी को क्रिटिसाइज नहीं करना चाहिए कि वह व्यक्ति ज्यादा अच्छा है, यह व्यक्ति काम ज्यादा अच्छा है| सब बराबर है भगवान ने सब को अलग टैलेंट दिया है| आजकल के मां-बाप कितनी बड़ी गलती करते हैं , तुलना करते हैं दसरे बच्चे से की देखो वह बच्चा कितना अच्छा है | वह तुमसे ज्यादा टैलेंटेड है- उसके तुमसे ज्यादा नंबर आए हैं और तुम देखो तुम्हारे कम नंबर आए हैं| उन्हें यह समझना चाहिए कि जब आप बच्चों की आलोचना करते हैं, उसको किसी और से क्रिटिसाइज करते हैं- तो उसके अंदर नफरत की भावना आती है| आप उसके अंदर के टैलेंट को मार रहे हैं, अगर आपका बच्चा पढ़ाई में अच्छा नहीं है तो क्या पता वह किसी और चीज में अच्छा हो, जिसमें उससे बेहतर कोई ना हो तो हमेशा हमें बच्चों को प्यार से समझाना चाहिए | उनके टैलेंट को बढ़ावा देना चाहिए, उनकी फिलिंग्स को बढ़ावा देना चाहिए, उनको गलत नहीं बोलना चाहिए| जब हम बच्चे को गलत बोलते हैं उसको दूसरे से कंपेयर करते हैं, तो हम अपने बच्चे का नुकसान कर रहे हैं और अपना नुकसान कर रहे हैं, क्योंकि आलोचना से सिर्फ नफरत का जन्म होता है| हमें हमेशा अपने बच्चे को समझना चाहिए कि क्या पता  उनका बच्चा  किसी और चीज में इंटरेस्ट रखता हो ,क्या पता वह किसी और चीज में अच्छा हो|

 

भगवान ने सब को अलग बनाया है तो हम यह क्यों सोच लेते हैं कि जैसे वह बच्चा अच्छा कर रहा है- वैसे ही हमारा बच्चा अच्छा करें| अगर बच्चे अपने मां बाप को कंपेयर करने लगेंगे कि देखो आपकी उम्र में मुकेश अंबानी कितना अमीर है और आप उसके आसपास भी नहीं हो तो यह गलत होगा ना ? आप उसे क्या बोलोगे कि नहीं मुकेश अंबानी की बात अलग है| उसका काम अलग है तो वही चीज की तो आप पर अप्लाई होती हैं| जब आप उसको किसी और से कंपेयर करते हो तो उसको भी तो बुरा लगता है | आपको कंपेयर करना बंद करना पड़ेगा और अपने बच्चे को मोटिवेट करिए कि तुम बहुत अच्छे हो हमें उनको यह बोलना बंद करना पड़ेगा कि- तुम कुछ नहीं कर सकते- तुम नकारा हो- तुम निकममे हो, उसकी जगह हमें यह बोलना चाहिए कि, तुम बहुत समझदार हो, तुम कुछ भी कर सकते हो, तुम इस जीवन में जो पाना चाहते हो वह पा सकते हो| जब आप अपने बच्चे को इस तरीके से बोलेंगे या अपने साथियो को या अपने परिवार के लोगों को प्रोत्साहित करेंगे तो वह और अच्छा काम करने के लिए प्रोत्साहित होंगे| इसलिए हमेशा पॉजिटिव बोलिए- हर एक की इज्जत करिये| किसी की आलोचना करने से, कंपेयर करने से, आप अपना नुकसान कर रहे हैं | साथ-साथ आप उसके अंदर अपने लिए नफरत की भावना को पैदा कर रहे हैं और यह नफरत आपके लिए बहुत नुकसानदेह भी हो सकती हैं| इसलिए हमेशा अच्छा व्यवहार करें| दूसरों को समझें कि अगर उसने यह काम किया तो क्यों किया - उसकी परिस्थिति में जाकर फील करें, कि क्या अगर आप उसकी जगह पर होते तो क्या आप वही काम करते हैं| क्योंकि आर्डर देना आसान है लेकिन जो बंदा परिस्थिति में है वह उसको ज्यादा अच्छी तरीके से जानता है- कि उसका कौन सा फैसला सही है और कौन सा गलत तो आलोचना करना बंद करें | दूसरों को गलत बोलना बंद करें चाहे वह बच्चे हो परिवार हो या आपके नीचे काम करने वाले व्यक्ति हो| इससे आप देखेंगे कि जब आप लोगों को प्रोत्साहित करेंगे तो वह और अच्छा काम करेंगे और मन लगाकर करेंगे उनके लिए फिर वह काम बोझ नहीं जिम्मेदारी हो जाएगा| वह उस काम को पूरी जिम्मेदारी से निभाएंगे, वह आप की भी इज्जत करेंगे और काम की भी इज्जत करेंगे| क्योंकि गुस्से से कराया गया काम या दबाव बनाकर कराया गया काम कोई भी व्यक्ति नहीं करना चाहता और वह तब तक ही करेगा जब तक वह आपके सामने होगा लेकिन जब प्यार की भावना से उसको समझाएंगे प्यार से उसको समझाएंगे तो वह काम को दिल लगाकर करेगा | और उसको और अच्छा करने का प्रयास करेगा

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