सच्चे दोस्त की पहचान कैसे होती है| सच्चे दोस्त और दोस्ती के मायने

 

सच्चे दोस्त की पहचान कैसे होती है| सच्चे दोस्त और दोस्ती के मायने

8 September 2022|visit my official website-https://mabmotivation.com   

 सच्चे दोस्त और दोस्ती के मायने दोस्ती क्या होती है? सच्चे मायने में दोस्त कौन होता है| कैसे समझे हम कि जिसे हम अपना सबसे प्रिय मित्र मानते हैं वह सच में उतना प्रिय है या नहीं? आजकल दोस्ती के मायने बदल चुके हैं वीकेंड में मिलना पार्टी करना,दारु पीना, दारु पी के गाड़ी चलाना, लड़कियां छेड़ना और बड़ी शान से कहना कि मैं और मेरा दोस्त गेड़ियां मारने जा रहे है |आजकल की दोस्ती कुछ इसी तरह होती है ना? तो आज हम जानेंगे कि हकीकत में सच्चे दोस्त किस तरीके के होते हैं? कैसे हम सच्चे दोस्त की पहचान कर सकते हैं जिसे हम अपना सबसे प्रिय दोस्त मानते हैं वह उतना प्रिय है या वो बाकी लोगों की तरह ही है चलिए शुरू करते हैं |


 दोस्ती की परिभाषा जाननी है तो कृष्ण और अर्जुन की दोस्ती से सीखना चाहिए जब रणभूमि में और धर्म के रास्ते पर चलने से अर्जुन का मन डगमगाने लगा था| जब उन्होंने अपना गांडीव धनुष रख के वह कृष्ण से कहने लगे कि आखिर मैं कैसे अपने पिता समान पितामह को, भगवान समान गुरु द्रोण को और अपने भाइयों पर, अपने मामा पर प्रहार करूं, क्या मिलेगा मुझे विध्वंस कर के, तो कृष्ण नहीं उन्हें समझाया और उसको धर्म के रास्ते पर चलने को कहा, उससे कहा कि क्षत्रिय को यह निर्बलता शोभा नहीं देती, उसको यह समझाया कि मानव रूपी शरीर का अंत होगा आत्माओं का नहीं और वह उनको मार के कोई गलत काम नहीं कर रहा बल्कि वह उनका अंत ना करके और ऐसी बातें करके गलत कर रहा है| अपने धर्म को छोड़कर कायरों वाली बात कर रहा है| तो यहां कृष्ण जो स्वयं ही साक्षात भगवान है लेकिन वह अर्जुन के मित्र भी हैं और सारथी भी, सारथी का क्या काम होता है अपने सारथ को सही राह दिखाना| उसको सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना उसको गलत करता देख उसको रोकना और जरूरत पड़ने पर सच्चा मित्र अपनी दोस्ती भी तोड़ सकता है अगर उसका मित्र उसकी बात नहीं समझता और गलत रास्ते पर चलता है हमने महाभारत में देखा था कि कि कैसे कदम कदम पर श्री कृष्ण अर्जुन को सही राह दिखा रहे थे| उसको गलत जाने से रोक रहे थे और ऐसे ही सच्चे मित्र भी करते हैं वह अपने दोस्त को गलत जाते नहीं देख सकते गलत करता नहीं देख सकते अगर दोस्त गलत कर रहा है तो वह उस को समझाते हैं अगर वह नहीं समझता तो उसको समझाने के लिए जो बन पड़े वह करते हैं| अगर उन्हें अपनी दोस्ती को तोड़ना भी पड़े तो वह एक पल के लिए संकोच नहीं करते क्योंकि सच्चा मित्र वही होता है जो अपने दोस्त के साथ हर राह पर रहे लेकिन उसको गलत जाता देख उसको रोके|


 अगर आपको किसी की दोस्ती से सीखना है तो आपने सुना होगा एक नाटक आता है तारक मेहता का उल्टा चश्मा| उसमें तारक और जेठा की दोस्ती कैसी है तारक हमेशा जेठा को सही राह दिखाता है उसकी हर मुसीबत में उसके साथ खड़ा होकर उसका डट के सामना करता है और उसको गलत जाता देख उसको समझाता और अगर वह नहीं समझता तो उससे दोस्ती तोड़ने की बात तक कह दी थी मुझे याद है 1 एपिसोड जिसमें जेठा कोरोना वैक्सीन लगाने की मना कर देता है और तारक उसको बहुत समझाता है कि लगवा लो जेठा  मगर जेठा कहता है कि मुझे सुई से डर लगता है मुझे नहीं लगवानी, तो तारक के लाख समझाने पर जेठा नहीं मानता तब तारक कहता है अगर तुम नहीं लगाओगे तो मैं तुमसे दोस्ती तोड़ दूंगा और मैं भी देखता हूं तुम कैसे नहीं लगाते| जेठा बीमारी का बहाना करके मना कर देता है सबको कि उसे बुखार है फिर सबको यही लगता है कि उसे बुखार हो गया है तो सब मान जाते हैं लेकिन तारक को पता होता है कि उसका दोस्त झूठ बोल रहा है| इसलिए वह उसका साथ नहीं देता और सबको जेठा के झूठ के बारे में बता देता है और फिर सब मिलकर प्लानिंग करते हैं और उसको  वैक्सीन लगवानी पड़ती है| तो अपने यहां क्या सीखा की दोस्ती वह नहीं होती जो आपके झूठ में साथ दें दोस्ती तो वह होती है जो आपको प्यार से नहीं तो गुस्से से आपको सही रास्ता दिखाएं और जो दोस्त आपके गलत को गलत नहीं कह पाता और आपका गलत में साथ देता है जैसे करण ने दुर्योधन का साथ दिया था उसके हर गलत फैसले में वह उसके साथ खड़ा था जिसकी वजह से दुर्योधन तो डूबा ही साथ में करण भी डूब गया| दुर्योधन के गलत करने के पीछे करण का भी पूरा साथ था उसे पता था कि उसका दोस्त गलत कर रहा है फिर भी वह उसको समझाने के बजाय उसका हर गलती में साथ देता गया और जब दोस्ती में गलत को गलत नहीं बोला जाता तो वह एक दिन आपको बहुत बड़ी मुसीबत में डाल देती हैं और ऐसी दोस्ती का अंत भी बहुत ही दुख दर्द से भरा होता है|

 

तो आपको वह दोस्त चुनना है और साथ ही साथ बनना भी है जो अपने दोस्त को गलत करता देख उसको समझा सके उसको मुंह पर बोल सके कि भाई तू गलत कर रहा है| यह मत कर अगर आपके दोस्त में इतनी हिम्मत नहीं है कि वो आपके गलत को गलत नहीं बोल सकता| इसका मतलब आप की एक मतलब की दोस्ती ह| अगर आपको दोस्त बनना है किसी का तो कृष्ण और तारक की तरह बनो जो अपने दोस्त को गलत जाता देख उसे समझाएं, आपको अच्छे काम के लिए प्रेरित करें, आप का विकास हो सामाजिक तौर पर , मान-सम्मान प्रतिष्ठा में आपके बढ़ोतरी हो| आप सिर्फ सैटरडे संडे वाले दोस्त मत बनो अगर दोस्त बनना ही है तो ऐसे दोस्त बनो कि अगर आप सालों साल नहीं भी मिले तो भी आपकी दोस्ती में बदलाव नहीं आया आप आज भी उसी तरीके से एक दूसरे से बात करते हो उसी तरीके से एक दूसरे से चीज शेयर करते हो जो पहले किया करते थे| आजकल तो सिर्फ सैटरडे संडे के लोग मिलते हैं और उसमें पार्टी करते हो और उसको समझते हैं कि यह मेरा बेस्ट फ्रेंड है मैं इसके साथ घूमता हूं फिरता हूं लेकिन दोस्ती के यह मायने नहीं होते| दोस्ती में तो यह होना चाहिए कि आप भी आगे बढ़ो मैं भी आगे बढ़ो और कैसे हम दोनों मिलकर आगे बढ़े, हमें यह सोचना चाहिए सिर्फ पार्टी करने के लिए अगर आप मिल रहे हो तो आप समझ जाओ कि आपकी दोस्ती सिर्फ मतलब की है|








 अगर आपके और आपके दोस्त के बीच में आगे बढ़ने की बात नहीं होती तो इसका मतलब यह है कि आप सिर्फ टाइम पास कर रहे हो और आपका दोस्त अगर गलत मैं आपका साथ देता है ,दारु पी के गाड़ी चला रहे हो और वह कहता है हां भाई और जोर से भगा तो या तो आप लोगों का एक्सीडेंट एक न एक दिन तय है और वह एक्सीडेंट आपसे सब कुछ छीन लेगा यहां तक कि आपकी जान भी जा सकती हैं| जैसा कर्ण की दुर्योधन के साथ दोस्ती निभाने से गई थी| तो दोस्ती बहुत सोच समझ कर करें अपने और अपने दोस्त को प्रोग्रेसिव बनाएं| एक रिसर्च में साबित हुआ था कि अगर आपको किसी के चरित्र के बारे में जानना है तो आप किसी भी इंसान के चार दोस्तो से मिल लो आप पांचवे का कैरेक्टर अपने आप ही बता दोगे क्योंकि आप की संगत ही आपके चरित्र का निर्माण करती है| आप जिस व्यक्ति के साथ बैठते हो आप वैसे ही बन जाते हो| अगर आप अच्छे व्यक्ति के साथ बैठते हो तो आप अच्छे व्यक्ति बन जाते हो लेकिन अगर आप गलत व्यक्ति के साथ बैठे हो तो आप गलत व्यक्ति ही बनोगे| तो हमेशा ऐसे व्यक्ति से दोस्ती करो जो आगे बढ़ने की बात करता है| लाइफ में कुछ  प्राप्त करना चाहता है|  कैसे हम दोनों अपने लक्ष्य तक पहुंचे| अगर आपके सर्कल में यह सारी बातें नहीं होती तो इसका मतलब आपको समझ जाना चाहिए कि आप गलत सर्कल में हैं आपको तुरंत ही अपने दोस्तों को बदल देना चाहिए और ऐसे व्यक्ति से दोस्ती करनी चाहिए जो आगे  बढ़ने की बात करता हूं आशा करता हूं कि आप लोगों को मेरी बात अच्छी लगी होगी और आप इस पर अमल भी करेंगे| 

Share this post:

Comments

Popular posts from this blog

अपने दिमाग को पॉजिटिव रखे चाहे कुछ भी हो जाए हमेशा खुश रहे

पैसे से खुशियां कैसे खरीदें?HOW TO BUY HAPPINESS THROUGH MONEY ?

अच्छे वक्त का इंतजार मत करो|Don't wait for opportunity, create it.