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उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए'' स्वामी

 6 September 2022|motivational blog, प्रेरक ब्लॉग--https://mabmotivation.com/

विवेकानंद


हममें से हर कोई चाहता है कि वह सक्सेसफुल हो अपने जीवन में जिससे उसका और उसके माता-पिता का नाम रोशन हो सब उसे इज्जत की नजर से देखें उसकी तारीफ करें उसको एफिशिएंट करें लेकिन उसके लिए आपका कामयाब होना होगा खुद का नाम कमाने के लिए आपको अपने अंदर एक आदत को ढालना होगा जो है कंसिस्टेंसी किसी भी काम में सक्सेस तभी मिलेगी जब आप इस मंत्र को याद कर लोगे'' उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए'' स्वामी  विवेकानंद


 जब हम वह काम रोज करें चलो मान लो आपको बॉडी बनानी है आप आप एक दिन जब जाओगे और घर आकर खुद को शीशे में देखोगे तो कोई बदलाव नहीं दिखेगा, दूसरे दिन जाओगे फिर घर आकर शीशे में देखोगे कोई बदलाव नहीं दिखेगा , एक हफ्ते बाद भी कोई बदलाव नहीं दिखेगा और अगर आप एक हफ्ते बाद बंद कर देते हो कि आपको कोई फायदा नहीं हुआ इसलिए अब मैं जिम नहीं जाऊंगा तो आप कभी भी एक अच्छी बॉडी नहीं बना सकते क्योंकि अच्छी बॉडी 1 दिन 1 हफ्ते 1 महीने में नहीं बनती उसके लिए आपको रोज जिम जाना होगा और हफ्ते में 2 दिन दिन जाकर आप 5 घंटे पसीना बहाओ और सोचो कि मेरी बॉडी बन जाएगी तो यह भी संभव नहीं है इसके लिए आपको क्या करना होगा आपको आधा घंटा एक घंटा रोज जिम जाना होगा जब आप रोज दिन जिम जाओगे तो 1 महीने में नहीं तो 2 महीने में 3 महीने में आपको अपने अंदर अंतर दिखने लगेगा लेकिन यही अगर आप 1 हफ्ते में छोड़ देते हो तो आपको अपने अंदर कोई अंतर नहीं लगेगा तो किसी भी चीज को पाने के लिए हमें कंसिस्टेंसी की बहुत जरूरत होती है अगर आपने 6 महीने जिम करें आपकी बहुत अच्छी बॉडी बन गई तो क्या आप अब जिम बंद कर दोगे तो क्या आपकी बॉडी वैसे ही रहेगी जैसी बहुत से महीने तक थी ? नहीं रहेगी वह धीरे धीरे ढलने  लगेगी इसलिए अगर हम कोई काम शुरू करते हैं कोई बिजनेस करना चाहते हैं तो हमें उसमें रोज काम करना पड़ेगा  कुछ समय काम कर के हम वह चीज नहीं पा सकते जो हम पाना चाहते हैं अगर हमने वो पा भी लिया तो भी हम में लगातर करते रहना होगा अगर हमने काम करना बंद कर दिया तो हम वही पोहुच जाएंगे जहां से हमने शुरू किया था यही कंसिस्टेंसी हमें हर चीज में चाहिए इस जीवन के हर एक पहलू पर हर एक कदम पर हमें कंसिस्टेंसी चाहिए अगर हम कुछ पाना चाहते हैं तो |


हम लोग दूसरे की शख्सियत से प्रभावित तो बहुत होते हैं कि आज वारेन बफेट कितना अमीर इंसान है और सिर्फ इन्वेस्ट करके वह उतना अमीर इंसान बना है तो मैं भी तो बन सकता हूं तो उसकी देखा देखी इन्वेस्टिंग शुरू कर देते हैं कि मैं भी वॉरेन बफे बनूंगा लेकिन वह ज्यादा दिन इन्वेस्टमेंट नहीं कर पाते शुरू तो वह बहुत जोश में करते हैं कि करेंगे लेकिन साल 6 महीने में उनकी हवा निकल जाती है वह यह भूल जाते हैं कि वारेन बफेट  साल 6 महीने इन्वेस्ट करके इतने अमीर इंसान नहीं बनेंगे उन्होंने 40 साल लगातार एक ही काम किया है वह है इन्वेस्टमेंट 40 साल की मेहनत के बाद आज वह इस दुनिया के सबसे अमीर इन्वेस्टर है उनकी बायोग्राफी देखकर प्रभावित तो बहुत से होते हैं लेकिन  कोई इस चीज को नहीं देखता कि उन्होंने 30 साल 40 साल लगातार इन्वेस्टमेंट ही करी है अगर वह 5 साल 6 साल इन्वेस्टमेंट करके छोड़ देते तो क्या जो उस पोजीशन पर पहुंच पाते नहीं वह आज उस पोजीशन पर इसलिए पहुंचे हैं कि उन्होंने 40 साल बिना रुके परेशानियों को नज़रअंदाज़ करते हुए उतार-चढ़ाव को झेला है उन्होंने उसके बाद जाकर आज वह इतने अमीर शख्स बने हैं|


 तो इससे हमें क्या सीखने को मिलता है कि अगर आप भी चाहते हो कि आप millionaire या billionaire बनो तो उसके लिए आपको सबसे पहले अपना गोल पता होना चाहिए कि आपका गोल क्या है वह आपको बिल्कुल साफ दिखना चाहिए उसके बाद आपको हर रोज मेहनत करनी है प्रयास करना है और यह आपको हर रोज करना है अगर आप फेल हो जाते हो तो आप को रुकना नहीं है आपको खुद कंसिस्टेंट देखना है अपने काम के प्रति और बड़े काम करने के लिए जरूरी नहीं है प्रयास बड़ा किया जाए छोटे-छोटे प्रयास करते रहो हर दिन अपने लक्ष्य के प्रति एक कदम बढ़ाते रहो आपके लिए आपका लक्ष्य उतना ही जरूरी होना चाहिए जितना आपके लिए सांस लेना जरूरी है जब हमारा लक्ष्य हमारी सांस की तरह हमारे शरीर का हिस्सा बन जाएगा तब लगा लो आपकी जीत निश्चित है लेकिन अगर आप दो-चार बार फेल होने से रुक जाते हो कि यार ,अब मैं मेहनत ही नहीं करूंगा,अब मेरी बस की नहीं है मेरी किस्मत खराब है ,मेरा तो कुछ हो ही नहीं सकता यह सोचकर अगर आप घर में बैठ जाते हो तब आप कभी भी कामयाब नहीं हो सकते कामयाबी का मूल मंत्र ही यही है ''उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए''- युवाओं को दिया गया स्वामी विवेकानंद का यह मंत्र गुलामी के दिनों में जितना कारगर और प्रेरणादायी था, आज स्वतंत्र भारत में भी उतना ही प्रासंगिक है  कि लगे रहो कुछ हो जीवन में आपको मेहनत करते रहना है आपको हर रोज अपने लक्ष्य के प्रति एक कदम बढ़ाना है |


ऐसे कामों को त्याग दो जो आपको आपके लक्ष्य की ओर नहीं ले जाते और यह सोचना बंद कर दो आप कुछ नहीं कर सकते या आपका कुछ नहीं होगा ,आपको अपने ऊपर भरोसा रखना है अगर आपने कोई काम हाथ में लिया है या कोई काम करने की ठानी है तो उस काम को तब तक करते रहना जब तक वह पूरा नहीं हो जाता अगर आप लगे रहोगे और अपना हर काम पूरी ईमानदारी से निभाओगे तो आप वह चीज जरूर पा लोगे जो आप पाना चाहते हो क्योंकि दोस्तों'' बड़ी जीत पाने के लिए आपको छोटी-छोटी हारो से घबराना नहीं है ''अगर आप बार-बार हार रहे हो तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप हारते ही रहोगे बस क्या पता आप जिस रास्ते पर हो वह गलत हो लेकिन अगर आप सही रास्ते को रोज ढूंढोगे तो एक ना एक दिन वह आपको जरुर मिलेगा , अगर आपको चाबी का गुच्छा दे दिया जाए जिसमें  100 चाबियां हो और उसमें से केवल एक ही चाबी ताले की है तो इसका मतलब है कि 99 चाबियां तो गलत है  लेकिन एक ऐसी चाबी उसमें जरूर है जिससे ताला जरूर खुलेगा तो हमारे जीवन की भी एक ही चाबी होती है  जो हमारी किस्मत का दरवाजा खोलेगी लेकिन उसके लिए हमें  99 ताले खोलने पड़ेंगे मतलब 99 बार कोषिश  करने पड़ेंगे और ऐसा नहीं है कि आपको अंत  में ही वह चाबी मिलेगी क्या पता आपको  10 प्रयास में मिल जाए 20 प्रयास में मिल जाए लेकिन मिलेगी जरूर चाहे  100 बारी में मिले लेकिन आपका किस्मत का ताला जरूर खुलेगा लेकिन उस ताले को खोलने के लिए आपको 100 बार चाबी लगानी पड़ेगी| अगर आप 5 10 प्रयास करके बोलते हो कि यार इनसे नहीं खुल रहा मैं अब नहीं कर सकता तो आप उस ताले को नहीं खोल पाओगे | यही गलती हम अपने जीवन के साथ करते हैं हम कुछ दिन तो मेहनत करते हैं लेकिन लगातार नहीं करते जिसके वजह से हम में से अधिकतर लोग आज असफल हैं क्योंकि हम हार मान जाते हैं लेकिन जो हार नहीं मानते वह उन एक परसेंट अमीर लोगों में से हैं जो इस दुनिया पर राज कर रहे हैं तो अगर आप इस दुनिया पर राज करना चाहते हो तो आपको अपने अंदर कंसिस्टेंसी लानी होगी अगर आप इस चीज को अपने अंदर डाल लेते हो तो मैं आपको गारंटी से कह सकता हूं कि आपको कोई भी फेल नहीं कर सकता|

 

                            ''लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती  कोशिश करने वालों की हार नहीं होती''

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